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स्तन कैंसर क्या हैं?
स्तन कैंसर स्तन की कोशिकाओं में शुरू होने वाला एक ट्यूमर है (जो शरीर के अन्य उत्तकों एवं बाकी हिस्सों को भी प्रभावित कर सकता है।) यह महिलाओं एवं पुरूषों दोनों में हो सकता है; यद्यपि पुरूषों में यह दुर्लभ ही मिलता है।[1,2]

आँकड़े

भारतीय महिलाओं में स्तन कैंसर प्रथमतर कैंसर है।[3,4]
यहाँ जो जानकारी दी गई है वह महिलाओं के स्तन कैंसर से संबंधित है।

आँकड़े
भारत में सन् 2012 में करीब 1,44,937 नये मामले दर्ज हुये है और करीब 70,218 मृत्यु स्तन कैंसर से हुईं।[5]

भारत में स्तन कैंसर से ग्रसित दो महिलाओं में से एक की मृत्यु हो जाती है। मुख्यतः इसका कारण स्तन कैंसर का देर से निदान है।[5]

स्तन रचना

 स्तन रचना विज्ञान[6]

 

महिला के स्तन में विशेष ग्रथियाँ (लोब्यूल्स) होती हैं जो दुग्ध का उत्पादन करती हैं। स्तन में दूध के उत्पादन की संरचना में 15-20 खण्ड होते हैं। प्रत्येक खण्ड में अनेक छोटे लोब्यूल्स होते हैं, जिनमें सूक्ष्म ग्रन्थियां होती हैं; जो दूध का उत्पाद करती है। स्तन की संरचना में छोटी छोटी दुग्ध नलिकाओं का जाल होता है, जिनके द्वारा दूध निप्पल से आता है। निप्पल के आसपास का परिवेश जो गहरे रंग का होता है, उसे ‘एरिओला‘ कहते है। स्तन में रक्त व लसीका वाहिकाओं और लिम्फ नाड्स भी होते हैं।

breast anatomy final

स्तन की लसीका प्रणाली
मुख्य रूप से स्तन कैंसर लसीका प्रणाली के माध्यम से फैलता है। लसीका वाहिकायें एक साफ तरल पदार्थ लाती है जिसे लिम्फ कहते है। ये लसीका वाहिकायें लिम्फ नोड्स में जाती है। लिम्फ नोड्स का आकार बीन्स की तरह होता है, इनमें संक्रमण से लड़ने वाली कोशिकाएँ (प्रतिरक्षा प्रणाली की कोशिकाएँ) मौजूद होती है। ये वाहिकायें स्तन से निम्न नलिकाओं में जाती है;

  • काॅलर बोन के आसपास के लिम्फ नोड्स
  • बगल के नीचे के लिम्फ नोड्स
  • छाती की हड्डी के पास स्तन के अंदर

जोखिम कारक

स्तन कैंसर के लिए जोखिम कारक वह है जो स्तन कैंसर ग्रसित होने की संभावना को बढ़ाता है।
जोखिम कारक होने का यह आशय नहीं है कि आपको निश्चित रूप से स्तन कैंसर होगा।

जोखिम कारक या तत्व ("संशोधन योग्य नही")  [7]

  • लिंग: महिलाओं में स्तन कैंसर पुरूषों की अपेक्षा ज्यादा पाया जाता है। स्तन कैंसर की कोशिकाओं की वृद्धि के लिये हार्मोन जिम्मेदार है। (इस्ट्रोजन और प्रोजेस्टरोन)
  • उम्र: उम्र बढ़ने के साथ स्तन कैंसर का खतरा भी बढ़ता जाता है। उत्तर भारत में किये गये एक अध्ययन के अनुसार स्तन कैंसर ग्रसित महिलाओं की औसत आयु 45 से 50 वर्ष के बीच है।
  • कैंसर का पारिवारिक इतिहास: यदि आपके परिवार में आपकी माता, बहन या बेटी को कम आयु में कैंसर हुआ हो तो स्तन कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। यदि आपके पिता या भाई को स्तन कैंसर हुआ हो तो भी स्तन कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। ज्यादातर स्तन कैंसर के मामलों में पारिवारिक इतिहास कारक नही पाया जाता है।[8] और पढ़े
  • आनुवंशिक कारक: यदि आपको अपने माता पिता से कुछ दुर्लभ जीन उत्परिवर्तन विरासत में मिले हैं तो आप स्तन कैंसर की वृद्धि के जोखिम में हैं। सबसे सामान्य जीन उत्परिवर्तन जो स्तन कैंसर के मरीजों में पाये जाते हैं वे हैं ‘‘बी.आर.सी.ए. 1‘‘ और बी.आर.सी.ए. 2 (ब्रेका 1 ओर ब्रेका 2)। इन उत्परिवर्तन जीन्स होने का मतलब यह नहीं है कि आपको स्तन कैंसर निश्चित रूप से हो जायेगा।

बिना उत्परिवर्तन के हुये कैंसर की तुलना में बी.आर.सी.ए. 1 और बी.आर.सी.ए. 2 उत्परिवर्तन से जुड़ा हुआ स्तन कैंसर युवा महिलाओं में ज्यादा होता है और दोनों स्तनों को प्रभावित करता हैं। महिलायें जो इन म्यूटेशन से जुड़ी हैं उनमें डिम्बग्रथि के कैंसर के विकास का खतरा भी बढ़ जाता है। स्तन कैंसर के साथ जुड़े हुये उत्परिवर्ती जीन्स देखने के लिये जेनेटिक परीक्षण उपलब्ध है। जेनेटिक परीक्षण हर किसी के लिये नहीं है। आपको अपने चिकित्सक से परामर्श या चर्चा करनी चाहिये कि यह परीक्षण आपके मामलें में सहायक है या नहीं।

  • मासिक धर्म का इतिहास: कम उम्र में मासिक धर्म की शुरूआत होना (12 साल की उम्र से पहले) स्तन कैंसर के खतरे को बढ़ाता है। इसी तरह अधिक उम्र में रजोनिवृति होने से भी स्तन कैंसर का खतरा बढ़ता है।[9]
  • स्तन कैंसर के अतीत का इतिहास: यदि आपको पहले एक स्तन में कैंसर हुआ है, तो दूसरे स्तन में कैंसर विकसित होने का खतरा बढ़ जाता है।

जोखिम कारक जिन्हें संशोधित किया जा सकता हैं (जीवन शैली से संबंधित)

  • मोटापा: अत्याधिक मोटापा स्तन कैंसर के खतरे को बढ़ा देता है।[10] और पढ़े
  • गर्भावस्था : महिलायें जिन्होंने कभी गर्भधारण न किया हो उन्हें स्तन कैंसर का खतरा अधिक रहता हैं उन महिलाओं की तुलना में जिन्होनें एक या एक से अधिक बार गर्भधारण किया हो। इसी तरह महिलायें जिन्होनें 35 वर्ष की आयु के बाद गर्भधारण किया हो उन्हें भी स्तन कैंसर का खतरा अधिक रहता है।[11].
  • स्तनपान: स्तनपान न कराने या कम कराने से भी स्तन कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।[12].
  • मद्यपान: अत्याधिक मात्रा में शराब का सेवन स्तन कैंसर के खतरे को बढ़ाता है।
  • हार्मोन का सेवन: ‘‘संयुक्त एस्ट्रोजन और प्रोजेस्ट्रोन‘‘ हार्मोन थेरेपी दवाओं (हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी) का सेवन स्तन कैंसर के खतरे को बढ़ता है। यह थेरेपी महिलाओं को रजोनिवृति के लक्षणों से राहत पाने के लिये दी जाती है।[13]. दवाइयों का सेवन बंद करने के उपरांत जोखिम कम हो जाता हैं।
  • विकिरण अनावरण: बाल्यावस्था या युवावस्था में उपचार के दौरान सीने या छाती में विकिरण या रेडियशन प्राप्त करना अथवा मध्यम से उच्च मात्रा में विकिरण के जोखिम में रहने से स्तन कैंसर का खतरा बढ़ता है।

संकेत एवं लक्षण

 स्तन कैंसर संकेत एवं लक्षण

  • स्तन कैंसर का सबसे आम लक्षण स्तन में गांठ होता है। यदि यह गाँठ अनियमित किनारों के साथ सख्त भी है तो इसके कैंसर युक्त होने की संभावना अधिक है।[14,15]
  • स्तन या निप्पल के रूप में कोई परिवर्तन[16,17]
    1. स्तन के आकार एवं बनावट में अस्पष्टीकृत परिवर्तन
    2. स्तन में अस्पष्टीकृत सिकुड़न
    3. स्तन में अस्पष्टीकृत सूजन, विशेष रूप से एक तरफ
    4. स्तन के आकार में असमानता (महिलाओं में एक सतन की तुलना में दूसरा स्तन थोड़ा स्तन थोड़ा छोटा होता है। लेकिन अगर यह विषमता हाल ही मं पाई गई है तो अपने चिकित्सक से परामर्श करना चाहिए।)
    5. स्तन में कही भी प्रगर्तन या गड्ढ़ा पड़ना।
    6. निप्पल के अंदर की ओर धसना या उल्टा होना।
    7. निप्पल या उसके आसपास की त्वचा में ललिमा।
    8. स्तन की त्वचा में असामान्य छिद्र, जो दिखने में संतरे के छिलके जैसी लगती है।
  • माँ के दूध के अलावा स्तन से पानी जैसा या खूनयुक्त स्त्राव [18]
  • लिम्फ नोड्स में सूजन

स्तन कैंसर के लिम्फ नोड्स तक फैलने के कारण बगल या कालर बोन के आसपास सूजन हो सकती है। आप हर महीने स्वयं स्तन परीक्षण करके स्तन कैंसर के इन लक्षणों क जाँच कर सकते है। यदि आपको कुछ भी असमान्य मिलता है तो अपने चिकित्सक से परामर्श करें। [19].

निदान

 स्तन कैंसर का निदान [20]

  • शारीरिक परीक्षण: चिकित्सक आपके स्तन व बगल के हिस्से में गांठ का पता लगाने के लिए परिस्पर्शन द्वारा परीक्षण करेगा। निप्पल के परीक्षण में कोई संदिग्ध स्त्राव, त्वचा में परिवर्तन या अंदर की तरफ खिचांव जैसे लक्षणों के लिये देखा जाएगा।
  • इमेजिंग परीक्षण
    1. मैमोग्राम: मैमोग्राफी मशीन आपके स्तन के चित्र लेने के लिए कम मात्रा की एक्सरे का उपयोग करती है। मशीन प्रत्येक स्तन पर दबाव डालकर एक्सरे चित्र लेती है। यह जाँच आमतौर पर स्तन कैंसर का जल्दी पता लगाने के लिये प्रयोग किया जाता है।
      1. डिजिटल मैमोग्राम: एक डिजिटल मैमोग्राम कम्प्यूटर पठनीय प्रारूप में प्रत्येक स्तन की इलेक्ट्राॅनिक फिल्मों को संग्रह करता है। यह एक मानक मैमोग्राम की तुलना में भिन्न है जिसमें एक्सरे फिल्म सीधे बनाई जाती है।
      2. नैदानिक मैमोग्राम: यह परीक्षण असामान्य मैमोग्राम या स्तन की विषमता की जाँच करने हेतु किया जाता है। इसमें सामान्य मैमोग्राम से अतिरिक्त चित्रों को लिया जाता है।
    2. स्तन अल्ट्रासाउंड: इस प्रक्रिया में अल्ट्रासाउंड मशीन उच्च आवृति ध्वनि तरंगो को आपके स्तन से भेजती है और स्तन के ऊतकों से प्राप्त ध्वनि संकेतों को कम्प्यूटर स्क्रीन पर चित्र के रूप में परिवर्तित करती है। इन चित्रों द्वारा डाॅक्टर को किसी असामान्यता का पता चलता है। स्तन अल्ट्रासाउंड द्वारा पुटिका और ठोस ऊतक के बीच का अंतर पता चल सकता है।
    3. एम.आर.आई स्कैन: इस प्रक्रिया में, एक उच्चस्तरीय चुबंक और कम्प्यूटर द्वारा स्कैन करके स्तन व आसपास के अंगो का विस्तृत चित्र बनाया जाता है। स्तन का एम.आर.आई. स्कैन केवल विशिष्ट मामलों में करना उचित है जहाँ मैमोग्राम अपर्याप्त सिद्ध हुआ हो।
  • बायोप्सी (जीवित ऊतकों की जाँच):
    1. एफ.एन.ए.सी. (सुई की जाँच): शारीरिक परीक्षण मैमोग्राम में विषमता मिलने पर स्तन के असामान्य क्षेत्र से सुई की जाँच की जाती है। इसमें एक पतली सुई और सिरिंज द्वारा गाँठ से थोड़ा सा द्रव्य लेकर उसमें कैंसर की कोशिकाओं की जाँच की जाती है। यह जाँच बेहोश किये बिना ही की जाती है।
    2. कोर बायोप्सी: इस प्रक्रिया में एक बड़ी खोखली सुई स्तन की गाँठ में डालकर बेलनाकार टुकड़ों को निकाला जाता है। इन टुकड़ों की लैब में जाँच की जाती है। इस परीक्षण में सुई की जाँच से अधिक ऊतक प्राप्त होते हैं।
    3. स्टीरियोटैक्टिक बायोप्सी: इस परीक्षण में डाॅक्टर कम्प्यूटरीकृत चित्रों का उपयोग करते हुये स्तन के ऊतकों तक पहुँचकर जाँच के लिये टुकड़ा लेता है। यह जाँच संवेदनाहरण में की जाती है।
    4. सर्जिकल (ओपन) बायोप्सी: कभी कभी कैंसर की जाँच करने के लिये स्तन की गांठ का एक हिस्सा या पूरी गांठ शल्य चिकित्सा द्वारा बाहर निकाली जाती है, जिसकी प्रयोग शाला में जाँच की जाती है। यह प्रक्रिया बेहोशी में की जाती है।
  • निप्पल स्त्राव कोशिका विज्ञान (निप्पल स्त्राव परीक्षा): इस परीक्षण में निप्पल से निकले तरल पदार्थ को माइक्रोस्कोप द्वारा देखकर उसमें कैंसर कोशिकाओं की उपस्थिति पता लगाई जाती है। यदि इस जाँच का परिणाम नकारात्मक हो, परन्तु डाॅक्टर को लाक्षणिक संदेह हो तो वह अन्य परीक्षणों द्वारा निदान कर सकता है।

प्रारंभिक जाँच

 प्रारंभिक जाँच[21,22]

  • क्लीनिकल ब्रेस्ट परीक्षण (स्तन परीक्षण)

सभी महिलाओं को 30 साल की उम्र के बाद प्रति वर्ष क्लीनिकल ब्रेस्ट परीक्षण अवश्य कराना चाहिये। अस्पताल में स्तन परीक्षण एक डाॅक्टर, नर्स या चिकित्सा संबंधी सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा किया जाता है। इस जाँच में चिकित्सक पहले आपके स्तन के निप्पल त्वचा, आकार या आकृति में असामान्यताएँ / परिवर्तन को सावधानी पूर्वक देखेगा। फिर उंगलियों का प्रयोग करके परीक्षक किसी भी गाँठ की उपस्थिति को स्तनों में महसूस करेगा। दोनों स्तन के बगल में भी परीक्षण करेगा जिससे लिम्फ नोड्स की किसी भी सूजन का पता लगाया जा सकें।

  • स्वयं स्तन परीक्षण (बी.एस.ई.)

आपको अपने स्तनों का स्वयं परीक्षण करने का स्पष्ट ज्ञान होना चाहिए। अपने स्तनों की महसूस कीजिए और अगर स्तन में किसी भी प्रकार का परिवर्तन लगता है, तो तुरन्त चिकित्सक से सलाह लें।
बी.एस.ई. स्तन कैंसर के शुरूआती लक्षण देखने के लिये, 20 साल से अधिक उम्र की महिलाओं के लिये एक विकल्प है।

 ** पूर्व निदान आपकी उंगलियों पर **

  • स्वयं स्तन परीक्षण की विधि:

 

हर महीने स्वयं स्तन परिक्षण करें!

  • मैमोग्राम परिक्षण
    चिकित्सक की सलाह के अनुसार कराये।

रोकथाम

 स्तन कैंसर की रोकथाम 

जेनेटिक परीक्षण द्वारा रोकथाम [23]

यदि आपके परिवार में (माँ, बहन या बेटी) कोई भी स्तन कैंसर से ग्रस्त रहा हो तो आपको बी.आर.सी.ए.1 और बी.आर.सी.ए.2 जीन म्यूटिशन की उपस्थिति के लिये आनुवांशिक परीक्षण कराना चाहिए। हालांकि यदि उत्परिवर्तित जीन की उपसिथति है तो यह निश्चित नही है कि आपको स्तन कैंसर हो जायेगा। लेकिन यदि अनुवांशिक परीक्षण सकारात्मक है तो आपको आनुवांशिक परामर्श और सलाह की आवश्यकता है।

जीवन शैली से संबंधित जोखिम कारकों से रोकथाम: [24]

  • शरीर के वजन को संतुलित बनाये रखें।
  • नियमित रूप से व्यायाम करें।
  • धूम्रपान एवं अत्याधिक शराब से बचें।
  • स्तनपान कराएं।
  • अनावश्यक विकिरण जोखिम से बचें।

चरण एवं उपचार

 स्तन कैंसर चरण [25]

 

स्तन कैंसर की अवस्थाएँ निम्नलिखित विशेषताओं पर आधारित है:

  • गांठ/घाव/या ट्यूमर का माप
  • क्या कैंसर आक्रामक है?
  • क्या कैंसर लसीका ग्रंथि (लिम्फ नोड्स) में फैला है या नही?
  • क्या कैंसर शरीर के अन्य भागों में फैला है?

 टी.एन.एम. अवस्था प्रणाली

टी.एन.एम. प्रणाली निम्नलिखित पर आधारित है:

  • ट्यूमर का माप (टी. ट्यूमर के लिये)
  • लिम्फ नोड में फैलाव (एन. नोड के लिये)
  • शरीर के अन्य अंगों तक फैलाव (एम. मेटास्टेसिस के लिये)

स्तन कैंसर का ईलाज/उपचार

स्तन कैंसर के उपचार के लिये विभिन्न विधियाँ है:

  • सर्जरी
  • रेडियोथेरेपी (बिजली की सिकाई)
  • कीमोथेरेपी (दवाओं द्वारा)
  • हार्मोन थेरेपी

आपकी व्यक्तिगत उपचार योजना निम्न कारकों पर निर्भर करती है:

  • स्तन कैंसर का नैदानिक चरण
  • कैंसर की हिस्टोपैथोलाजी रिपोर्ट (बायोप्सी)
  • रजोनिवृति की स्थिति
  • कैंसर उत्तकों में हार्मोन रिसेप्टर्स की उपस्थिति या अभाव
  • आपका स्वाथ्य

 स्तन कैंसर के लिये शल्य चिकित्सा/सर्जरी

सर्जरी का प्रकार इन पर निर्भर करता है:

  • स्तन में कैंसर का माप
  • क्या कैंसर शरीर के अन्य हिस्से में फैला है
  • स्तनों का माप

स्तन कैंसर की सर्जरी के विभिन्न प्रकार है:

  • लम्पेक्टमी: इस प्रक्रिया में केवल गांठ या कैंसर ग्रस्त क्षेत्र को निकाला जाता है।
  • क्आड्रैरेनटैक्टमी: इस प्रक्रिया में स्तन का वह चैथाई हिस्सा जो ट्यूमर से प्रभावित है निकाल दिया जाता है।
  • सामान्य स्तन उच्छेदन: इस प्रक्रिया में स्तन के ऊतकों को (ऊपरी त्वचा व निप्पल सहित) तथा छाती की मांस-पेशिओं के ऊपर कें ऊतकों को हटाया जाता है।
  • तत्वरूप स्तन उच्छेदन: उपर्लिखित संरचनाओं के अतिरिक्त छाती की दीवार की मांसपेशियों को भी हटा दिया जाता है।
  • संशोधित तत्वरूप स्तन उच्छेदन: इस प्रक्रिया में स्तन, निप्पल और बगल में स्थित लिम्फ नोड्स को हटाया जाता है, परन्तु छाती की दीवार की मांसपेशियों को बचा लिया जाता है।

 स्तन कैंसर के लिये रेडियोथेरेपी

रेडियोथेरेपी उपचार में कैंसर की कोशिकाओं को नष्ट करने के लिये विकिरण का उपयोग किया जाता हैे। सर्जरी के उपरांत यह एक सामान्य उपचार है। स्तन संरक्षण सर्जरी के बाद महिलाओं को आमतौर पर शेष स्तन में रेडियोथेरेपी दी जाती है।

बाहरी बीम विकिरण: यह रेडियोथेरेपी का एक प्रकार है जो स्तन कैंसर के लिये सबसे अधिक इस्तेमाल किया जाता है। 'बाहरी बीम विकिरण' में विकिरणे लक्ष्य, यानि कैंसर से प्रभावित क्षेत्र पर डाली जाती है।

ब्रेकीथेरेपी: रेडियोथेरेपी के इस प्रकार में कैंसर ग्रस्त क्षेत्र में विकिरण वितरित करने के लिये एक प्रत्यारोपण का उपयोग किया जाता है। स्तन कैंसर के उपचार के लिये रेडियोधर्मी बीज या छर्रो को कैंसर के निकट स्तन के अंदर रखा जाता है।

स्तन कैंसर कीमोथेरेपी चिकित्सा अथवा रसायन चिकित्सा

रसायन चिकित्सा में कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने हेतु कैंसर विरोधी दवाओं का उपयोग किया जाता हैं। रसायन चिकित्सा को तीन प्रमुख उद्देश्यों के लिये इस्तेमाल किया जाता है:

  • सहायक चिकित्सा: इस चिकित्सा का उद्देश्य प्रारंभिक सर्जरी और विकिरण के बाद कैंसर को वापस आने से रोकने के लिये है। यदि कैंसर स्तन और बगल की लसीका ग्रंथिओं तक ही सीमित हो तब भी यह सम्भव है कि कैंसर कोशिकायें शरीर के अन्य भागों तक गई हो। कीमोथेरेपी ऐसी कोशिकाओं को नष्ट करने का भी प्रयत्न करती है।
  • नव सहायक चिकित्सा: सर्जरी से पहले कीमोथेरेपी द्वारा ट्यूमर को छोटा किया जाता है, जिससे सर्जरी आसान हो जाती है।
  • मेटास्टेटिक रोग का उपचार: यदि कैंसर शरीर के अन्य भागों में फैल गया है तो कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने के लिये कीमोथेरेपी चिकित्सा दी जाती है।

 कुछ रसायन चिकित्सा दवायें जो स्तन कैंसर के उपचार में दी जाती है:

  • पैक्ली टैक्सल
  • कार्बोप्लेटिन
  • एड्रियामाइसिन
  • साइक्लोपोसफामाइड
  • 5 फलयूरोसिल
  • हरसेप्टिन: यह दवा उन महिलाओं को दी जाती है जिनके स्तन कैंसर में एच.ई.आर.2 जीन उपस्थित है।

हार्मोन चिकित्सा


हार्मोन थेरेपी का प्रयोग उन महिलाओं में किया जाता है जिनका ट्यूमर एस्ट्रोजन या प्रोजेस्टेरोन के प्रति संवेदनशील है (कैंसर विकसित करने के लिये कारक हार्मोन)। हार्मोन रिसेप्टर्स (एस्ट्रोजन, प्रोजेस्टेरोन ण्च.ई.आर.-2) का परीक्षण आपके ट्यूमर के टुकड़े पर किया जाता हैं जो कुछ विशिष्ट प्रयोगशालाओं में संभव है।

सभी स्तन कैंसर हार्मोन के प्रति संवेदनशील नही होते है, इसलिये यह आवश्यक नही है कि सभी तरह के स्तन कैंसरों के ईलाज में हार्मोन अवरूद्ध उपचार सहायक हो। यह दवायें उन कैंसरों के विकास को रोकती है जिनमें हार्मोन रिसेप्टर्स उपस्थित होते हैं। अन्य चिकित्साओं के साथ अंतः स्त्रावी थैरेपी (एंडोक्रीन थैरेपी) मूल स्तन कैंसर के जोखिम को कम करने में सहायक सिद्ध होती है।

संदर्भ

 संदर्भ 

 

[1] http://www.breastcancer.org/symptoms/understand_bc/what_is_bc
[2] Hotko YS. Male breast cancer: clinical presentation, diagnosis, treatment. Exp Oncol 2013;35:303-10
[3] http://www.who.int/cancer/detection/breastcancer/en/
[4] Agarwal G, Ramakant P. Breast Cancer Care in India: The Current Scenario and the Challenges for the Future. Breast Care (Basel). 2008;3:21-27
[5] GLOBOCAN 2012 (IARC), Section of Cancer Surveillance (15/1/2015)
[6] http://www.webmd.com/women/picture-of-the-breasts
[7] http://www.cancer.org/cancer/breastcancer/detailedguide/breast-cancer-risk-factors
[8] Pharoah PD, Day NE, Duffy S, et al. Family history and the risk of breast cancer: A systematic review and meta- analysis. Int J Cancer 1997;71:800-09
[9] Collaborative Group on Hormonal Factors in Breast Cancer. Menarche, menopause, and breast cancer risk: individual participant meta-analysis, including 118,964 women with breast cancer from 117 epidemiological studies. Lancet Oncol 2012;13:1141-51
[10] Vrieling A, Buck K, Kaaks R, et al. Adult weight gain in relation to breast cancer risk by estrogen and progesterone receptor status: a meta-analysis. Breast Cancer Res Treat 2010;123:641-49
[11] Ewertz M, Duffy SW, Adami HO, et al. Age at first birth, parity and risk of breast cancer: a meta-analysis of 8 studies from the Nordic countries. Int J Cancer 1990;15;46:597-603
[12] Collaborative Group on Hormonal Factors in Breast Cancer. Breast cancer and breastfeeding: collaborative reanalysis of individual data from 47 epidemiological studies in 30 countries, including 50?302 women with breast cancer and 96,973 women without the disease. Lancet 2002;360:187-95
[13] Rinaldi S, Peeters PHM, Bezemer ID, et al. Relationship of alcohol intake and sex steroid concentrations in blood in pre- and post-menopausal women: the European Prospective Investigation into Cancer and Nutrition. Cancer Cause Control 2006;17:1033-43
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[15] Acton A, Breast Cancer: New Insights for the Healthcare Professional, ScholarlyEditions, Atlanta; 2011
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[17] Sharma S. K., Alternate Therapies, Diamond Pocket Books (P) Ltd.; 2000
[18] http://www.nlm.nih.gov/medlineplus/ency/article/001515.htm
[19] American Cancer Society. Breast Cancer Early Detection. Accessed at http://www.cancer.org/cancer/breastcancer/index on January 15, 2015
[20] http://www.cancer.org/cancer/breastcancer/detailedguide/breast-cancer-diagnosis
[21] American Cancer Society. Detailed Guide: Breast Cancer. 2014. Accessed at http://www.cancer.org/Cancer/BreastCancer/DetailedGuide/index on November 13, 2014
[22] American Cancer Society. Breast Cancer Prevention and Early Detection. 2014 Accessed at http://www.cancer.org/cancer/breastcancer/detailedguide/index on January 15, 2015
[23] http://www.cancerresearchuk.org/about-cancer/type/breast-cancer/about/risks/breast-cancer-genes
[24] http://www.cancer.gov/cancertopics/pdq/prevention/breast/Patient
[25] American Joint Committee on Cancer 7th Edition. Breast Cancer Staging. American Cancer Society. 2009. Accessed at https://cancerstaging.org/references-tools/quickreferences/Documents/BreastMedium.pdf 

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